भाव शून्यता मुझसे बेहतर कौन जाने ,
दिल की गलती छुपाने के लाखों बहाने ।
एक पक्षधर की द्विपक्षी नीति,
किसी से छल किसी से प्रीति ।
मानवता की आड़ में,
इस नश्वर संसार में।
समाज की बुराई के कारण ,
दोस्तों में लड़ाई के कारण।
झूल रहा है भविष्य अधर में ,
भाव हीनता के सागर में ।
यदि मानव हो तो एक कृपा करो ,
भाव शून्यता की तुलना सामर्थ्यहीनता से मत करो।
Monday, April 28, 2008
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2 comments:
ohhh... itni shuddh hindi. shuddh? shuddh nahi jante kya.. nirma namak hi keval shuddh namak hota hai. ab bachhe bhi jane iske gun!!!
hmmm... wiase nice nice!!!
hmmmm... as usual kuch samajh mei nayi aaya. toh samjha dena.....plzzzzz
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